बहराइच : यूपीएस (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) सभी कर्मचारियों के लिए छलावा है। यदि ओपीएस से बेहतर यूपीएस है तो एक देश में, एक संविधान में तीन तरह की पेंशन स्कीम क्यों? इसका तुलनात्मक अध्ययन करें तो कई विसंगतियां हैं। यह बात माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने कही।
उन्होंने कहा कि यह कहां का न्याय है कि 10 वर्ष की सेवा के बाद यूपीएस में हम 10 हजार पेंशन के अधिकारी होंगे, जबकि हमारे जनप्रतिनिधि पांच वर्ष की सेवा के बाद पूर्ण पेंशन प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का प्रस्तावित यूपीएस आंकड़ों की बाजीगरी मात्र है। एनपीएस और यूपीएस दोनों में पेंशन पाने से पहले कर्मचारियों के वेतन से निश्चित कटौती की जा रही है।
पहले न्यू-अव यू, हमें चाहिए पुरानी पेंशन’
वहराइच : केंद्र सरकार के एनपीएस के अतिरिक्त यूपीएस पेंशन स्कीम की घोषणा का उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने विरोध । किया है। जिलाध्यक्ष विद्या विलास पाठक ने बताया कि यह मात्र एक छलावा है। हमें पुरानी पेंशन चाहिए। हमें न यूपीएस चाहिए न एनपीएस। एक बात सरकार को समझ में क्यों नहीं आती कि अगर यह इतनी अच्छी योजना है तो इसे सांसद और विधायक क्यों नहीं ले लेते हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के बीच फूट डालना चाहती है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ इस नई यूपीएस को टेंशन मानता है और इसका विरोध करता है। सरकार पुरानी पेंशन बहाल नहीं करती संगठन चुप नहीं बैठेगा
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