परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता का विवाद सुप्रीम कोर्ट से हल होगा। इस मामले में दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में लगातार सुनवाई हो रही है। उम्मीद है कि शीर्ष कोर्ट से फैसला होने के बाद उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों की सात साल बाद पदोन्नति हो सकेगी। विवाद के कारण वर्तमान में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 62,229 शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हो सकी है।
27 फरवरी को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को चार मार्च तक हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए थे। शीर्ष अदालत ने ने शिक्षकों को तीन वर्ग में विभाजित करते हुए पूछा था कि तीन सितंबर 2001 के पूर्व नियुक्त, विनिमय 2001 से नियुक्त शिक्षक और 23 अगस्त से 2010 से 29 जुलाई 2011 तक नियुक्त शिक्षक पर एनसीटीई की क्या राय है? छह मार्च को सुनवाई में एनसीटीई ने अपना पक्ष रखा है। अब इस मामले की सुनवाई 20 मार्च को होनी है।
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