अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज ने अपने 40 शिक्षकों और कर्मचारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया है। ग्रीष्मावकाश के दौरान व्हाट्सऐप पर भेजे गए नोटिस में सभी को जुलाई से सेवा न देने और अपना वेतन प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को शिक्षक-कर्मचारी प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय पहुंचे और जनसुनवाई कर रहे पूर्व मंत्री और शहर दक्षिणी विधायक नीलकंठ तिवारी से न्याय की गुहार लगाई।
इन शिक्षक-कर्मचारियों ने विधायक नीलकंठ तिवारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर कॉलेज प्रबंधन और प्राचार्य पर मनमानी, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 20-25 वर्षों से कॉलेज में प्रबंधकीय योजना के तहत शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान प्राचार्य और प्रबंध समिति पिछले तीन वर्षों से शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्राओं का उत्पीड़न कर रही है। प्राचार्य और प्रबंधक
की गलत नीतियों के कारण छात्राओं के प्रवेश में कमी आई है। अब इसका ठीकरा शिक्षकों पर फोड़ा जा रहा है। शिक्षकों ने यहभी आरोप लगाया कि कॉलेज को दान में मिली सुविधाओं का उपयोग छात्राओं के लिए न होकर व्यावसायिक कार्यों में किया जा रहा है। फीस में विभिन्न मदों को दिखाकर अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है और छात्राओं पर मनमाना जुर्माना लगाया जाता है। ढाई महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दिया
गया, जिससे परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई पर संकट आ गया है। शिक्षकों ने कहा कि छुट्टी के समय नोटिस व्हाट्सऐप पर भेजा गया, ताकि शिक्षक कहीं गुहार न लगा सकें। शिक्षक डॉ. बृजेश पांडेय, डॉ. श्वेता सिंह सहित अन्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रकरण में हस्तक्षेप की मांग की है। जनसुनवाई में मौजूद विधायक नीलकंठ तिवारी ने शिक्षकों और कर्मचारियों को सहयोग का आश्वासन दिया।
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