मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तबादलों में गड़बड़ी पर सख्त रुख अपनाते हुए दो आईएएस अधिकारियों महानिरीक्षक निबंधन समीर वर्मा, निदेशक प्रशासन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं भवानी सिंह खंगारौत को पद से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है। साथ ही स्टांप-रजिस्ट्रेशन विभाग में गड़बड़ी देखते हुए 200 उपनिबंधकों, निबंधन लिपिकों के तबादलों पर रोक लगा दी। इसके अलावा इनमें नियम दरकिनार कर किए गए तबादलों की जांच का आदेश दिया है।
इससे पहले स्टांप एवं पंजीयन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने महानिरीक्षक निबंधन समीर वर्मा के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर महानिरीक्षक निबंधन का तबादला करने या छुट्टी पर भेजने का आग्रह करते हुए मामले की एसटीएफ से जांच करने का अनुरोध किया है।
लगाए गंभीर आरोप : मंत्री ने 18 जून को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि महानिरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार की कई शिकायतें मिली हैं। कई बार दागी अफसरों को मनमाफिक तैनाती दी गई। इसमें लेन-देन की शिकायतें हैं। उनकी भूमिका भी संदिग्ध है। तबादलों पर मुझसे सतही चर्चा के बाद कहा कि उप निबंधकों, निबंधन सहायकों का तबादला मेरा अधिकार है, आपसे पुन: चर्चा का कोई औचित्य नहीं है।
उप निबंधकों और निबंधन सहायकों की तबादला सूची देखने से पता चलता है कि इसमें घोर लापरवाही की गई। दागदार अधिकारियों की महत्वपूर्ण तैनाती की गई। सीधी भर्ती के अफसरों को अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण कार्यालयों में तैनाती दी गई। इसमें स्पष्ट भ्रष्टाचार दिख रहा है।
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