लखनऊ, । बीकेटी में विलय हो चुके सहपुरवा प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक पर दलित बच्चों के साथ भेदभाव का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में महिला अभिभावक स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र शुक्ला पर जाति सूचक शब्दों से संबोधित करने का आरोप लगा रही हैं। महिलाएं आरोप लगा रही हैं कि प्रधानाध्यापक कहते हैं कि तुम्हारे बच्चे पढ़ाई करेंगे तो गोबर कौन उठाएगा? अभिभावकों ने कई अन्य आरोप भी लगाए हैं। यह वीडियो दो से तीन दिन पुराना है। हिन्दुस्तान वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
सांसद ने निकाला था मार्च: आप के प्रदेश प्रभारी व सांसद संजय सिंह गुरुवार को सहपुरवा पहुंचे थे और प्राइमरी स्कूल के विलय के विरोध में बच्चों और अभिभावकों के साथ पैदल मार्च निकाला था। इस स्कूल में नामांकित 16 बच्चे नए स्कूल नहीं जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बता दें कि इस प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापक शैलेंद्र शुक्ला के अलावा दो सहायक अध्यापक और शिक्षा मित्र तैनात थे। अब स्कूल का विलय करीब ढाई किलोमीटर स्थित पहाड़पुर कंपोजिट विद्यालय में कर दिया गया है।
प्रिंसिपल की बात
अभिभावकों द्वारा लगाए गये सभी आरोप गलत
इस मामले में प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र शुक्ला का कहना है कि अभिभावकों द्वारा लगाए गये सभी आरोप गलत है। स्कूल का विलय होने से नाराज बच्चों के अभिभावक इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। जबकि स्कूल प्रबंध समिति (एसएमसी) की सहमति से स्कूल का विलय किया गया। एसएमसी में अध्यक्ष, सचिव और सदस्य में शामिल अभिभावकों ने हस्ताक्षर किये हैं। दूसरे शिक्षकों के साथ रोज सहपुरवा गांव जाकर अभिभावकों से बच्चों को नए स्कूल में भेजने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन वह बच्चे को नहीं भेज रहे हैं।
प्रधानाध्यापक पर अभिभावकों द्वारा लगाए आरोप निराधार हैं। स्कूल के विलय से बच्चों के अभिभावक नाराज हैं। प्रीति शुक्ला, खंड शिक्षा अधिकारी, बीकेटी
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