लखनऊ। संपत्तियों की रजिस्ट्री के बाद खतौनी में नाम दर्ज कराने के लिए लोगों को अब बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। गैर विवादित मामलों में अब रजिस्ट्री होते ही स्वत: खतौनी में नाम दर्ज हो जाएगा। राजस्व परिषद संपत्तियों को आधार से लिंक कराने जा रहा है। इसके साथ ही तय प्रारूप पर रजिस्ट्री की पूरी सूचना ली जाएगी। इसके बाद एसमएस या वाट्सएप पर विक्रेता पक्ष को नोटिस भेजकर अनापत्ति ली जाएगी और इसके मिलते ही खतौनी में नाम दर्ज हो जाएगा।
बंद होगा खेल : प्रदेश में मौजूदा समय संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने के बाद खतौनी में नाम दर्ज कराने के लिए अलग से आवेदन देना होता है। इसके बाद विक्रेता पक्ष को मैनुअल नोटिस भेजा जाता है। कुछ लोग इसमें बेजा आपत्तियां लगा देते हैं। इसके चलते तय समय सीमा 35 दिन में क्रेता का नाम खतौनी में दर्ज नहीं हो पाता है व मामला लंबित हो जाता है। इसीलिए सभी प्रक्रिया ऑनलाइन करने की तैयारी है।
आधार से जोड़ेंगे
राजस्व परिषद सभी संपत्तियों में खातेदार और सहखातेदारों का नाम आधार से जोड़ते हुए लिंक कराने जा रहा है। इसमें उसका पूरा विवरण होगा। रजिस्ट्री के समय यह पता चल जाएगा कि संपत्ति को कौन बेच रहा है और उसके हिस्से में कितनी संपत्तियां हैं। रजिस्ट्री होते ही स्टांप एवं निबंधन विभाग तुरंत इसकी ऑनलाइन पूरी जानकारी राजस्व परिषद को देगा। फिर विक्रेता के साथ उसके खातेदारों को पंजीकृत नंबर पर नोटिस भेजा जाएगा। लेखपालों द्वारा ऑनलाइन ही इसकी रिपोर्ट दी जाएगी और स्वत: 35 दिनों क्रेता का नाम खतौनी में दर्ज कर दिया जाएगा।
स्टांप विभाग से तुरंत ऑनलाइन रजिस्ट्रियों की कापी ली जाएगी। तय प्रारूप पर सूचना ली जाएगी। इसके बाद स्वत: नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नोटिस का जवाब ऑनलाइन पोर्टल पर जैसे आएगा, खतौनी में नाम दर्ज कर दिया जाएगा।
अनिल कुमार अध्यक्ष, राजस्व परिषद
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