अदालत की कड़ी टिप्पणी: “रिश्वत से डिग्री और नौकरी नहीं खरीदी जा सकती” – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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सहायक प्रोफेसर की फर्जी नियुक्ति और ₹२२ लाख की धोखाधड़ी के मामले में हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका।

 प्रयागराज:

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने समाज में बढ़ती भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह धारणा गलत है कि पैसे के दम पर विश्वविद्यालय की डिग्री या सरकारी नौकरी खरीदी जा सकती है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण सक्सेना की खंडपीठ ने ₹२२ लाख से अधिक की धोखाधड़ी में आरोपी महिला के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

कानपुर की तान्या दीक्षित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी प्रियंका सिंह सेंगर और उसके साथियों ने उसे अलीगढ़ के विश्वविद्यालय में पीएचडी और फिर कानपुर में सहायक प्रोफेसर की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। जून २०२४ में आरोपियों ने तान्या को फर्जी मार्कशीट, प्रवेश पत्र और नियुक्ति पत्र थमा दिए। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद डरावनी स्थिति है कि एक शिक्षित महिला भी भ्रष्टाचार की कार्यप्रणाली पर भरोसा करके इस ठगी का शिकार हो गई।

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