प्रयागराज। यूपी बोर्ड के नए शैक्षणिक सत्र में उन स्कूलों पर खास नजर रहेगी जहां उपलब्ध संसाधन की तुलना में छात्रसंख्या अधिक है। कई स्कूल दूसरे अमान्य स्कूल के बच्चों का पंजीकरण अपने यहां से करवा देते हैं। कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जहां कमरे तो 10-15 ही हैं लेकिन 10वीं-12वीं के छात्र-छात्राओं की संख्या ही दो-ढाई हजार हो जाती है। इस लिहाज से अन्य कक्षाओं छह, सात, आठ, नौ और 11 की संख्या जोड़ने पर जो छात्रसंख्या बनेगी वह बहुत होगी। संदिग्घ स्कूलों की पड़ताल के लिए बोर्ड की ओर से गाइडलाइन तैयार की जा रही है। संबंधित जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक के अलावा बोर्ड की टीम भेजकर भी जांच करवाई जाएगी, ताकि मानक के अनुरूप अध्ययन-अध्यापन हो सके।
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