प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के भविष्य को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत दाखिले के लिए अभिभावकों को केवल ऑनलाइन आवेदन के लिए विवश नहीं किया जा सकता।
मामला: याची ख्वाजा शमशाद अहमद ने तकनीकी दिक्कतों के कारण अपने बच्चे के नर्सरी प्रवेश के लिए ऑफलाइन (मैनुअल) आवेदन दिया था, जिसे बीएसए प्रयागराज ने खारिज कर दिया था। कोर्ट की टिप्पणी: “यदि अभिभावक किसी कारणवश ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, तो संबंधित अधिकारी का दायित्व है कि वह मैनुअल आवेदन स्वीकार कर उसे प्रक्रिया में शामिल करे।”
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