नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट | अप्रैल 2026
देश की आर्थिक स्थिति के लिहाज से कर्ज लेने की गति में तेजी को एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों में जमा होने वाली धनराशि में गिरावट को लेकर गहरी चिंता जताई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अब बचत के पारंपरिक तरीकों से मुंह मोड़कर निजी उपभोग के लिए ऋण लेने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
जमा और ऋण के बीच बढ़ता ‘डिपॉजिट गैप’
रिजर्व बैंक की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के बीच जमा वृद्धि की दर 11 फीसदी के आसपास रही है। इसके विपरीत, क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) की दर फरवरी 2026 तक 15.2 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।
“बैंक अब ज्यादा तेजी से खुदरा ऋण (Retail Loans) दे रहे हैं, लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद भी जमा राशि में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।” – RBI रिपोर्ट
ऋण वृद्धि के प्रमुख आंकड़े (सालाना आधार पर %)
| ऋण श्रेणी | दिसंबर 2025 | जनवरी 2026 | फरवरी 2026 |
|---|---|---|---|
| व्यक्तिगत ऋण | 14.6 | 14.9 | 15.2 |
| उच्च जोखिम ऋण | 17.1 | 17.5 | 17.6 |
| कृषि ऋण | 12.1 | 11.4 | 12.3 |
| वाहन ऋण | 14.8 | 14.0 | 13.7 |
क्यों बढ़ रहा है जोखिम?
आंकड़ों से पता चलता है कि डिजिटल लोन और आसान प्रक्रियाओं के कारण पर्सनल लोन की मांग में तेजी आई है। उच्च जोखिम वाले इन ऋणों के डूबने का खतरा भी उतना ही अधिक रहता है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) वर्तमान में कर्ज देने वाली सबसे सक्रिय संस्थाएं बनकर उभरी हैं।
निष्कर्ष: हालांकि अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ना एक सकारात्मक पहलू है, लेकिन जमा और ऋण के बीच यह असंतुलन भविष्य में बैंकों के लिए नकदी का संकट पैदा कर सकता है। निवेशकों और आम नागरिकों को इस दिशा में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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