कस्तूरबा विद्यालयों में प्रायोगिक शिक्षा पर रहेगा जोर – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ। प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में भी पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ प्रयोग, गतिविधि और प्रत्यक्ष अनुभव से विभिन्न विषयों की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए लर्निंग बाय डूइंग के तहत बालिकाओं को विज्ञान एवं गणित विषय की अधिक प्रयोगात्मक, रुचिकर और प्रभावी शिक्षा मुहैय्या कराई जाएगी ताकि परिषदीय स्कूलों की भांति कस्तूरबा की बालिकाओं में तर्कशक्ति, समस्या समाधान क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आत्मविश्वास बढ़ सके। इसके लिए सरकार ने निर्देश जारी कर कहा है कि इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए, ताकि प्रदेश की बालिकाएं विज्ञान और गणित में न केवल दक्ष बनें, बल्कि आत्मनिर्भर भविष्य की ओर भी मजबूती से कदम बढ़ा सकें। केजीबीवी में भी अब लर्निंग बाय डूइंग’ कार्यक्रम के माध्यम से विज्ञान और गणित की शिक्षा को व्यवहारिक और अनुभव-आधारित बनाया जा रहा है। शिक्षकों के प्रशिक्षण से लेकर विद्यालय स्तर पर आवश्यक टूल्स और कंज्यूमेबल्स की उपलब्धता तक, हर स्तर पर यह व्यवस्था की जा रही है ताकि बालिकाएं केवल पाठ्यक्रम तक ही सीमित नहीं रहें बल्कि प्रयोगों के माध्यम से सीख सकें। यह पहल छात्राओं में वैज्ञानिक सोच, तर्क क्षमता और आत्मविश्वास को सुदृढ़ करेगी।

सभी केजीबीवी में शुरू होगा लर्निंग बाय डूइंग

इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक बालिका को गुणवत्तापूर्ण कौशल शिक्षा के साथ आधुनिक व समान अवसरों वाली शिक्षा उपलब्ध कराना शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। लिहाजा सभी केजीबीवी में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ कार्यक्रम को इसी दृष्टि से शुरू किया जा रहा है जिसमें विज्ञान और गणित को अनुभव और प्रयोग के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। यह पहल वंचित और ग्रामीण पृष्ठभूमि की बालिकाओं को भी भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं के लिए सक्षम और आत्मनिर्भर बनाएगी।

कौशल और समझ की प्रयोगशाला बनेगा केजीबीवी

‘लर्निंग बाय डूइंग’ एक प्रशिक्षण के साथ-साथ विज्ञान और गणित शिक्षण में गुणात्मक परिवर्तन का माध्यम है। इससे बालिकाओं में तर्कशक्ति, समस्या समाधान क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आत्मविश्वास का विकास होगा। यह पहल केजीबीवी को आवासीय विद्यालय के साथ-साथ कौशल और समझ की प्रयोगशाला के रूप में स्थापित करेगी। विशेष रूप से ग्रामीण, वंचित और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग की बालिकाओं को इससे आधुनिक और समान अवसरों वाली शिक्षा का लाभ मिलेगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय को ₹43,250 की धनराशि स्थानीय स्तर पर जारी करने की सीमा निर्धारित कर दी है। इस धनराशि से विद्यालयों में लर्निंग बाय डूइंग कार्यक्रम के टूल्स, प्रयोग सामग्री एवं कंज्यूमेबल्स क्रय की जाएगी, जिससे छात्राएं विज्ञान और गणित के सिद्धांतों को प्रयोगों के माध्यम से समझ सकें।

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