ऑनलाइन क्लास समय की जरूरत: शिक्षकों की दूरी, ईंधन और व्यवस्था पर बड़ा सवाल – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

primarymaster.in


 

ऑनलाइन क्लास समय की जरूरत: शिक्षकों की दूरी, ईंधन और व्यवस्था पर बड़ा सवाल

देश में बढ़ती ईंधन खपत और शिक्षकों की दूरस्थ तैनाती के बीच ऑनलाइन शिक्षा को लेकर एक शिक्षक की भावुक अपील सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के एक शिक्षक अनुराग सिंह ने अपने पिछले साढ़े दस वर्षों की नौकरी का आंकलन करते हुए बताया कि विद्यालय की दूरी ने उनके जीवन, समय और आर्थिक स्थिति पर कितना बड़ा प्रभाव डाला है।

अनुराग सिंह के अनुसार, उनका विद्यालय घर से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। इस दूरी के कारण वे पिछले 10.5 वर्षों में लगभग 3 लाख 52 हजार 800 किलोमीटर की यात्रा केवल विद्यालय आने-जाने के लिए कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने करीब 17 लाख 64 हजार रुपये ईंधन और यात्रा पर खर्च किए, जबकि लगभग 17 हजार 640 लीटर पेट्रोल, डीजल या सीएनजी की खपत हुई।

उन्होंने बताया कि यह गणना प्रतिदिन 70 किलोमीटर विद्यालय जाने और 70 किलोमीटर वापस आने तथा एक शैक्षणिक वर्ष में लगभग 240 कार्यदिवसों को आधार मानकर की गई है।

दूरस्थ पोस्टिंग पर उठे सवाल

शिक्षक ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार घर के नजदीक विद्यालयों में पद रिक्त होने के बावजूद शिक्षकों की तैनाती दूरस्थ क्षेत्रों में कर दी जाती है। इससे न केवल शिक्षक का समय और धन प्रभावित होता है, बल्कि उसकी कार्यक्षमता और मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि आज बेसिक शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में शिक्षक 40 से 100 किलोमीटर दूर विद्यालयों में कार्यरत हैं। ऐसे में विद्यालय समय से पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अनुराग सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने TET में 124 अंक प्राप्त किए थे, इसके बावजूद उनकी पोस्टिंग घर से 70 किलोमीटर दूर हुई, जबकि उनसे कम अंक पाने वाले कई शिक्षक अपने घर के नजदीक तैनात हैं।

ऑनलाइन क्लास से ईंधन बचत का दावा

अनुराग सिंह ने प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचत की अपील का हवाला देते हुए कहा कि यदि बेसिक शिक्षा विभाग में कुछ समय के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएं, तो प्रदेश स्तर पर प्रतिदिन लाखों लीटर ईंधन की बचत संभव है।

उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 5 लाख बेसिक शिक्षक कार्यरत हैं। यदि प्रत्येक शिक्षक औसतन प्रतिदिन 40 किलोमीटर की यात्रा करता है, तो ऑनलाइन कक्षाओं की स्थिति में प्रति शिक्षक लगभग 4 लीटर ईंधन की बचत हो सकती है। इस हिसाब से प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 15 से 20 लाख लीटर फ्यूल की बचत संभव है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ शिक्षक बाइक या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं, तब भी कम से कम 10 लाख लीटर ईंधन प्रतिदिन बचाया जा सकता है।

“देशहित में अस्थायी ऑनलाइन शिक्षा पर विचार जरूरी”

अनुराग सिंह का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में, जब विद्यालय सीमित दिनों के लिए खुल रहे हैं और ईंधन बचत की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है, तब अस्थायी रूप से ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था अपनाने में कोई बड़ी समस्या नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे न केवल शिक्षकों को राहत मिलेगी बल्कि देश के संसाधनों की भी बड़ी बचत होगी।

उन्होंने अपनी बात का समापन “देश सर्वोपरि, जय हिन्द, जय भारत” के संदेश के साथ किया।

Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA

Leave a Comment

WordPress Emporium LearnPress – Content Drip LearnPress Frontend Editor LearnPress – Gradebook LearnPress – Instructor Commission LearnPress - Live Course Add-on LearnPress – myCRED Integration LearnPress – Random Quiz LearnPress – Sorting Choice Question LearnPress – Stripe Payment LearnPress – WooCommerce Payment Methods Integration