कक्षा 9 में तीन भाषा नियम को चुनौती पर केंद्र से जवाब तलब
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से कक्षा 9 के छात्रों के लिए 2026-27 शैक्षणिक सत्र से तीसरी भाषा अनिवार्य किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर शीर्ष न्यायालय ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह तक स्थगित कर दी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वह यह बताएं कि नई भाषा नीति लागू करने के लिए सरकार और संबंधित संस्थान कितने तैयार हैं। अदालत ने नीति को लागू करने की प्रशासनिक और शैक्षणिक तैयारियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
याचिका में संस्था की ओर से दायर याचिकाकर्ताओं और उनके वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि अगले शैक्षणिक सत्र से छात्रों पर तीन भाषाएं पढ़ने की बाध्यता लागू की जा रही है, जबकि कई स्कूलों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं।
याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई ने 9 अप्रैल 2026 को स्पष्ट किया था कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा का नियम 2029-30 तक लागू नहीं होगा, लेकिन 15 मई 2026 के नए सर्कुलर से अचानक स्थिति बदल दी गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले पर विस्तृत सुनवाई जुलाई में की जाएगी।
वहीं, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला संवैधानिक और संघीय ढांचे से जुड़ा है और किसी भी भाषा को छात्रों पर थोपा नहीं जा सकता।
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