प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) इस बार उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के लिए बड़ी परीक्षा साबित होने जा रही है। आयोग पहली बार इस महत्वपूर्ण परीक्षा का आयोजन करने जा रहा है। ऐसे में परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराना आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
2021 में पेपर लीक से रद्द हुई थी परीक्षा
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में आयोजित यूपी टीईटी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद्द करनी पड़ी थी। उस मामले में 23 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और लाखों अभ्यर्थियों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से इस बार परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पहली बार आयोग करेगा आयोजन
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को पहली बार यूपी टीईटी आयोजित कराने की जिम्मेदारी मिली है। आयोग के अध्यक्ष पूर्व एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार हैं। आयोग का दावा है कि परीक्षा को शांतिपूर्ण और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने कराया पंजीकरण
इस बार यूपी टीईटी के लिए करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के कारण परीक्षा प्रबंधन, केंद्र निर्धारण, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।
पेपर लीक रोकने के लिए कड़े इंतजाम
आयोग के उप सचिव संजय सिंह के अनुसार परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता, पेपर लीक या नकल माफियाओं की गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा लागू सख्त कानूनों और अध्यादेशों के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक भर्ती का रास्ता होगा साफ
यूपी टीईटी केवल पात्रता परीक्षा ही नहीं, बल्कि प्रदेश में प्रस्तावित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 1.43 लाख से अधिक पद रिक्त बताए जा रहे हैं। ऐसे में यदि परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न होती है तो आगामी शिक्षक भर्ती का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
अभ्यर्थियों की नजर परीक्षा पर
पिछले अनुभवों को देखते हुए अभ्यर्थियों की निगाहें आयोग की तैयारियों पर टिकी हुई हैं। उम्मीदवारों को उम्मीद है कि इस बार परीक्षा पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आयोजित होगी, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।
यूपी टीईटी 2026 का सफल आयोजन न केवल आयोग की कार्यक्षमता की परीक्षा होगा, बल्कि प्रदेश में लंबित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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