जन्म और मृत्यु के देर से पंजीकरण के नियमों को सख्त बनाने वाला नया कानून देश भर में एक अक्तूबर से लागू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
इसमें सबसे बड़ा बदलाव दो साल या उससे ज्यादा जन्म/मृत्यु रजिस्ट्रेशन कराने पर कोर्ट का आदेश जरूरी होगा। नए कानून के तहत, यदि पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी हो जाती है, तो पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। इसके अलावा यदि पंजीकरण में एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी हो तो पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही होगा। इसमें सत्यापन और निर्धारित शुल्क भी लिया जाएगा। पहले दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म/मृत्यु नामांकन पर भी नामांकन संभव था, लेकिन एक वर्ष से अधिक विलंब वाली प्रक्रिया के तहत डीएम/एसडीएम/अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर कार्रवाई की जाती थी।
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