प्रयागराज। 1962 से पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म इसी दिन हुआ था। उनके जन्मदिन के जरिये शिक्षकों को समर्पित इस दिवस पर बृहस्पतिवार को जगह-जगह सम्मान समारोह होंगे। लेकिन, वह निराश ही रहेंगे, जिनके मामले वर्षों से दफ्तर से कोर्ट तक लंबित हैं।
एक आंकड़े के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के 41,198 मामले लंबित हैं। यह मामले विभाग स्तर पर न सुलझे और कोर्ट तक पहुंच गए। शिक्षकों के प्रमोशन, नियुक्ति, स्थानांतरण, विनियमितीकरण, मृतक आश्रित नियुक्ति, जीपीएफ, वेतन वृद्धि, पेंशन, निलंबन समेत तमाम मामले निर्धारित अवधि में हल नहीं किए गए।
वहीं, प्रबंधन शिक्षक विवाद, रिक्त पदों पर भी नियुक्ति की अनुमति न
मिलने जैसे मामले विभाग स्तर पर हल नहीं हुए। इसलिए ऐसे मामले हाईकोर्ट पहुंच गए।
कोर्ट केस इनफॉर्मेशन सिस्टम के अनुसार हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ में बेसिक शिक्षा के 17,745 मामले लंबित हैं। इसमें से विभाग की ओर से 2068 मामलों में काउंटर ही नहीं लगाया गया।
ऐसे ही माध्यमिक शिक्षा के
18,717 मामले विचाराधीन हैं। इन मामलों के निस्तारण के लिए शिक्षा निदेशालय में उप निदेशक स्तर के अधिकारी और कई कर्मचारियों को लगाया गया है। इन मामलों की पैरवी पर विभाग हर वर्ष करोड़ों खर्च कर रहा है। इसके अलावा उच्च शिक्षा 4,736 मामले कोर्ट में लंबित हैं। इसमें तमाम ऐसे मामले हैं, जो विभाग स्तर पर हल हो सकते थे। शिक्षकों की आरोप है कि अफसरों की उदासीनता और भ्रष्टाचार के चलते मामलों का निस्तारण नहीं होता तो वह उन्हें कोर्ट का सहारा लेते हैं।
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