महंगी किताबें छात्रों की मजबूरी बनीं, एक किताब के दो भाग, दोगुना दाम – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ,   निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने में माध्यमिक शिक्षा विभाग नाकाम साबित हो रहा है। एनसीईआरटी की सस्ती किताबों की बजाए निजी स्कूल प्रकाशकों से साठगांठ कर महंगी किताबें छात्रों को पढ़वा रहे हैं। खुद माध्यमिक शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी है और उसने जांच अभियान के लिए जारी पत्र में लिखा है कि 361 प्रतिशत तक महंगी किताबें स्कूल छात्रों को पढ़ा रहे हैं।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को पत्र लिखा है कि कक्षा 9 से कक्षा 12 तक एनसीईआरटी की सस्ती किताबें पढ़ाने के लिए तीन मुद्रकों को अधिकृत किया गया है। मेसर्स पायनियर प्रिन्टर्स एंड पब्लिशर्स आगरा, मेसर्स सिंघल एजेन्सीज पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर लखनऊ और मेसर्स पीताम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड झांसी को अधिकृत किया गया है। कक्षा नौ की अंग्रेजी की किताबें 18 रुपये से लेकर 44 रुपये तक हैं और ऐसे ही गणित की 53 रुपये की किताब है। सभी विषयों की किताबों में सबसे महंगी किताब 89 रुपये की है। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट लिखा है कि उनके संज्ञान में आया है कि स्कूलों में अनाधिकृत किताबें अनावश्यक रूप से चलाई जा रही हैं। कतिपय संस्थाओं व पुस्तक विक्रेताओं के बीच दुरभिसंधि के कारण निजी प्रकाशकों की किताबें व गाइड बुक जो परिषदीय मूल्यों की तुलना में 149 प्रतिशत से लेकर 361 प्रतिशत तक महंगी हैं। यह जानने के बावजूद भी विभाग के अधिकारी ढंग से छापेमारी नहीं कर पा रहे हैं। 15 अप्रैल तक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग की मिलीभगत:उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्रा कहते हैं कि हर साल सिर्फ एक आदेश जारी कर माध्यमिक शिक्षा विभाग अपने दायित्व की खानापूरी कर लेता है। निजी स्कूल, प्रकाशक और विभाग की मिलीभगत से ही हर साल अभिभावक लुटने को मजबूर होते हैं। आखिर खुलेआम किताब-कॉपी निर्धारित दुकान से पूरा सेट महंगे दाम पर खरीदने को मजबूर करने वाले स्कूलों की मान्यता क्यों नहीं खत्म की गई। जांच के नाम पर खेल किया जाता है।

एक किताब के दो पार्ट और दोगुना दाम

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय महामंत्री नरेन्द्र कुमार वर्मा कहते हैं कि निजी स्कल तो एक पुस्तक को दो-दो पार्ट में बांटकर मनचाहे दाम पर बेच रहे हैं। एक ही शैक्षिक सत्र में टर्म-वन व टर्म-टू की दो-दो किताबें महंगे दाम पर खरीदने की मजबूरी होती है।

मंत्री के निर्देश भी बेअसर

माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी की ओर से शिक्षाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वह निजी स्कूलों पर शिकंजा कसें। उनके खिलाफ जिलों में अभियान चलाया जाए और मिलीभगत कर ऊंचे दामों पर बेची जा रहीं किताबें, ड्रेस व अन्य सामग्री पर रोक लगे।

सोशल मीडिया पर मंत्री के वीडियो वायरल हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

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