प्रयागराज, । साक्षर भारत मिशन के तहत संविदा पर रखे गए प्रदेशभर के एक लाख शिक्षा प्रेरकों को बकाया मानदेय के रूप में चार अरब से अधिक की धनराशि दी जाएगी। साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने 60 जिलों के प्राचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारियों से साक्षरता कार्मिकों का सत्यापन करते हुए उनका विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार ने 2009-10 में यह योजना शुरू की थी।
उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में 2011-12 और प्रयागराज में 2013-14 सत्र से यह योजना चालू हुई थी। इसके तहत विभिन्न जिलों के 49921 लोक शिक्षा केंद्रों पर दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर 99482 शिक्षा प्रेरक संविदा पर तैनात किए गए थे। हालांकि 31 मार्च 2018 को योजना बंद कर दी गई थी। शिक्षा प्रेरकों का काम 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को साक्षर बनने के लिए प्रेरित करना था।
प्रयागराज में ही 2633 शिक्षा प्रेरकों को 38 महीने का मानदेय नहीं मिला था। शिक्षा प्रेरकों से बीएलओ से लेकर हाउसहोल्ड सर्वे और अन्य सरकारी योजनाओं में काम भी लिया गया था। मानदेय भुगतान को लेकर मिर्जापुर के 100 से अधिक शिक्षा प्रेरकों ने हाईकोर्ट की इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ में याचिकाएं भी दायर की थीं। प्रयागराज मंडल में ही 45 करोड़ से अधिक धनराशि बकाया है।
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