लखनऊः 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण में भेदभाव का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने शनिवार को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर नारेबाजी की। हंगामा और नारेबाजी के बीच पुलिस से अभ्यर्थियों की झड़प भी हुई। पुलिस ने सभी को जबरन बस में बैठाकर ईको गार्डन छोड़ दिया। यहां अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि उच्चतम न्यायालय में 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में सरकार ने ठोस पक्ष नहीं रखा तो अभ्यर्थी सामूहिक आत्मदाह करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी। चयन परिणाम आने के बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ। लंबे संघर्ष के बाद 13 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने आरक्षित वर्ग के पक्ष में फैसला सुनाया और नियुक्ति देने के आदेश दिए, लेकिन सरकार आदेश का पालन नहीं कर रही। अभ्यर्थी अमित मौर्य ने कहा कि सरकार अनुभवी अधिवक्ता भेजकर उनके पक्ष में प्रभावी पैरवी करे। अब तक 22 से अधिक तिथियां बीत चुकी हैं, लेकिन सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है, जिससे अभ्यर्थियों में निराशा है।
अमरेंद्र पटेल ने कहा कि अंबेडकर नगर सहित कई जिलों से राजधानी आ रहे अभ्यर्थियों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। आरोप लगाया कि कुछ को फोन कर धमकाया भी गया, जिससे कई लोग नहीं पहुंच सके। पुलिस के माध्यम से आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। घेराव में रवि पटेल व उमाकांत समेत कई अभ्यर्थी शामिल हुए।
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