प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बैंक का लोन चुकता होने के बाद बैंक बंधक रास्ते अपने पास नहीं रख सकता है। कोर्ट ने याची के बैंक ऑफ इंडिया में बंधक उसके मकान के बैनामा और अन्य दस्तावेजों को दो सप्ताह के अंदर सुपुर्द करने का आदेश दिया है। गाजियाबाद की सीमा जैन की याचिका पर | 3 | न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने सुनवाई की।
याची उसका पक्ष अधिवक्ता रजत ऐरेन एवं राज कुमार सिंह ने रखते हुए दलील दी कि याची ने वर्ष 2002 में गाजियाबाद में एक मकान खरीदकर नगर निगम में नामान्तरण करवा लिया था। 10 वर्ष तक रहने के पश्चात 2012 में बैंक ऑफ इंडिया ने नोटिस भेजकर बताया कि मकान की पूर्व मालकिन अपने बेटे के 5 लाख के लोन में गारंटर थीं और मकान बंधक था। पूर्व मालकिन के बेटे द्वारा लंबे समय से लोन ना चुकाने से अब देनदारी 22 लाख रुपये से ऊपर है। ना चुकाने की स्थिति में बैंक द्वारा मकान का कब्जा ले लिया जाएगा।
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