निपुण असेसमेंट: गाजीपुर के 810 परिषदीय स्कूलों में 2 और 3 नवंबर को होगा बच्चों का ऑनलाइन टेस्ट, शत-प्रतिशत मूल्यांकन अनिवार्य
गाजीपुर। निपुण भारत मिशन के तहत जिले के 810 चिह्नित परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की शैक्षणिक दक्षता का एक बार फिर मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए 2 और 3 नवंबर को ऑनलाइन असेसमेंट टेस्ट आयोजित होगा। ‘कैच-अप कराओ, निपुण बनाओ’ अभियान के अंतर्गत होने वाले इस मूल्यांकन में विद्यालयों में नामांकित सभी बच्चों की सहभागिता अनिवार्य की गई है।
इस परीक्षा के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि पिछले कुछ महीनों में विशेष शिक्षण अभियान के तहत बच्चों की बुनियादी भाषा और गणित की दक्षता में कितना सुधार हुआ है।
बेसलाइन असेसमेंट के बाद कराया गया उपचारात्मक शिक्षण
निपुण भारत मिशन के अंतर्गत जिले के 810 चयनित विद्यालयों में बच्चों को बुनियादी शिक्षा में दक्ष बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इससे पहले 5 और 6 अक्टूबर को निपुण एप के माध्यम से बच्चों का बेसलाइन असेसमेंट कराया गया था।
बेसलाइन मूल्यांकन में सामने आई कमियों के आधार पर शिक्षकों ने वर्कशीट और अन्य शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया। विशेष रूप से कमजोर शैक्षणिक स्तर वाले बच्चों पर ध्यान देते हुए उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) कराया गया।
निपुण प्लस एप से होगा एंडलाइन असेसमेंट
अब अभियान के परिणामों की समीक्षा के लिए 2 और 3 नवंबर को निपुण प्लस एप के माध्यम से निपुण लक्ष्य आधारित ऑनलाइन असेसमेंट कराया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक विद्यालय में नामांकित शत-प्रतिशत बच्चों का मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाए।
20 दिसंबर के बाद होगा बाह्य मूल्यांकन
इस बार मूल्यांकन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 20 दिसंबर के बाद राज्य स्तर से स्वतंत्र बाह्य मूल्यांकन (External Assessment) भी प्रस्तावित है। ऐसे में विद्यालयों को बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति में सुधार करने और मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों, एआरपी और प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया है कि एंडलाइन असेसमेंट निर्धारित समय में निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से पूरा कराया जाए।
साथ ही शिक्षकों को लगातार अभ्यास, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और उपचारात्मक शिक्षण के माध्यम से बच्चों को निपुण लक्ष्य हासिल कराने के प्रयास जारी रखने को कहा गया है।
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