लखनऊ। कृषि क्षेत्र की केंद्र पोषित बड़ी योजनाओं को केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने एक छतरी के नीचे कर दिया है। इससे प्रदेश में संचालित केन्द्र पोषित कृषि क्षेत्र की योजनाओं का जहां बेहतर प्रबन्धन हो सकेगा। वहीं, किसानों के लिए अधिक उपयोगी योजनाओं को ज्यादा पैसा भी मिल सकेगा। कृषोन्नति योजना 2024-25 नामक इस छतरीनुमा योजना में प्रदेश में वर्तमान में संचालित कृषि की 11 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। इसके तहत अब एक योजना की राशि दूसरी जरूरतमंद योजनाओं में स्थानांतरित की जा सकेंगे।
खास बात यह है कि इसके लिए राज्य सरकार को केंद्रीय कृषि मंत्रालय से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। राज्य सरकार अपने स्तर से योजनाओं की जरूरतों के हिसाब से एक योजना की धनराशि को दूसरी योजनाओं में स्थानान्तरित कर सकेगी
पूर्व से संचालित ये केंद्रीय योजनाएं समाहित की गईं
क्रम सं केन्द्र पोषित योजनायें केन्द्रीय सहायता राशि (करोड़ रुपये में)
1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन 208.99
2. नेशनल मिशन ऑन इडिबल आयल सीड 26.55
3. परचेज ऑफ ब्रीडर सीड 1.27
4. नेशनल ई-गवर्नेन्स प्लान इन एग्रीकल्चर 157.23
5. नेशनल मिशन ऑन इडिबल आयल 1.67
6. सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्शटेंशन 235.41
7. मिशन फॉर इंटेग्रेटेड डेवलप्मेंट ऑफ हार्टीकल्चर 198. 26
8. सीड विलेज प्रोग्राम 57
9. नेशनल बैम्बू मिशन 9.89
10 सीड सर्टीफिकेशन 1.06
11. यूपी बीज विकास निगम 1.74
12. सीड टेस्टिंग लैब स्ट्रेंथनिंग एण्ड रिनोवेशन 1.66
केंद्र ने प्रदेश में कृषि के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न नामों से संचालित केन्द्र सहायतित 12 योजनाओं को कृषोन्नति योजना के तहत ला दिया है। ये सारी योजना कुल 844.30 करोड़ रुपये की है। यह केन्द्रांश है जो योजना का 60 है जबकि शेष 40हिस्सा राज्य सरकार की ओर से दिया जाना है।
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